कोसा के बारे मे

Write By: manoj Published In: कोसा रेशम Created Date: 2017-08-15 Hits: 5195 Comment: 1

छत्तीसगढ़ और कोसा रेशम

कोसा एक ऐसा सदाबहार फेब्रिक है जो न सिर्फ महिलाओं की पहली पसंद है, बल्कि पुरूषों मे भी ईसका आकर्षण कम नही है, कोसा जैसी गरिमा, लावण्य और खूबसूरती किसी और कपड़े मे नही है, प्राकृतिक और पर्यावरणमित्र होने के कारण यह अन्य कृतृिम वस्रों से बेहतर है।

छत्तीसगढ़ के कोसा के वस्र विश्व प्रसिद्ध हैं, विशेषकर रायगढ़ व चाम्पा की साड़ियां अपनी गुणवत्ता व विशिष्ट डिजाईन के कारण जाने जाते हैं, यहां के उत्पादित वस्रों की मांग भारत ही नही बल्कि पुरी दुनिया मे है।

कोसा रेशम का उत्पादन छत्तीसगढ़ मे

  • छत्तीसगढ़ वन बाहुल्य क्षेत्र है, तथा यहां कोसा के उत्पादन योग्य वृक्ष, साल, साजा, बेर तथा और अन्य वृक्षों की बहुतायत होने के कारण, वनों पर बहुतायत पर कोसा सिल्क के कोकून मिल जाते हैं, जिन्हे मुख्यतः ग्रामिणों तथा आदिवासियों द्वारा पेड़ से उतारकर संग्रहण किया जाता है, इसके अतिरिक्त शासन द्वारा सेरिकल्चर विभाग के माध्यम से हितग्राहियों द्वारा कोसे की खेती भी की जा रही है।
  • बुनकरों को स्थानिय संग्राहकों तथा सेरिकल्चर विभाग के माध्यम से कोसा उपलब्ध होता है, जिसका वे धागाकरण व रंगाई करने के पश्चात वस्रों की बुनाई करते हैं।

छत्तीसगढ़ मे कोसे की प्रजातियां

यहां कोसे की बहुत सी प्रजातियां पाई जाती है, जिनमे से कुछ का वर्णन निम्न है।

  1. डाबा ~ यह पालित प्रजाति का कोसा है, इसका धागा हल्का सुनहरे रंग का, चमकिला व चिकना होता है, रंगीन वस्र बनाने के लिऐ इसका धागा उपयुक्त है।
  2. रैली ~ यह मुख्यतः बस्तर क्षेत्र मे प्राकृतिक रूप से होता है, इसमे धागा प्रचूर मात्रा मे होता है, रैली के धागे का रंग हल्का मटमैला व खुरदूरा होता है, प्राकृतिक रंग के वस्रों को बनाने के लिऐ इसका धागा उपयुक्त है।
  3. बरफ ~ यह कोसा मुख्यतः बेर के पेड़ पर होता है, आकार मे छोटा, पर धागा प्रचुर मात्रा मे होता है, इसके धागे का रंग अन्य कोसों की तुलना मे अपेक्षाकृत कुछ सफेद होता है।
  4. बनेला ~ यह मुख्यतः वनो की ऊपज है, इसलिऐ बनेला या जंगली कोसा कहा जाता है, आकार मे बड़ा, ठोस व धागा बहुत मात्रा मे होता है, धागे का रंग सुनहरा व चमकिला होता है। अगस्त - सितम्बर के महीने मे वनो पर बहुतायत से होता है।

हमे कोसा वस्र क्यु धारण करना चाहिए?

  • कोसा वस्र दिखने मे बहुत आकर्षक व शानदार होते हैं, बाकी अन्य रेशमों की तुलना मे इनको अधिक देखभाल की आवश्यकता भी नही होती। कोसा वस्र बहुत मजबूत व लंबे समय तक चलने वाला वस्र है। प्रत्येक धुलाई के बाद इसकी चमक बढ़ती जाती है, कभी पुराने नही होते।
  • कोसा वस्र शरीर के अनुकूल होते हैं, यह गर्मी और सर्दी दोनो मौसम मे पहने जा सकते हैं। इनको पहनने से स्किन को कोई एलर्जी नही होती, जिनकी त्वचा संवेदनशील होती है वह भी धारण कर सकते हैं 
  • कोसा वस्रों को बहुत पवित्र माना जाता है। कोसा वस्रों पर जल्दी आग नही लगती, इसपर लगी आग फैलती भी नही है, अन्य सिंथेटिक कपड़ों की तरह जलने पर यह शरीर से चिपकती भी नही है। महिलाओं द्वारा रसोई बनाते समय पहनने योग्य अनुकूल वस्र है।
  • यह मुख्यतः वनों पर आधारित ऊपज है, कोसा वस्र उत्पादन मे किसी प्रकार के मशीनों व कारखाने की आवश्यकता नही होती, अतः किसी प्रकार का प्रदुषण नही होता अपितु पर्यावरण का संरक्षण होता है, इसके अतिरिक्त यह निम्न आय वर्ग के लोगों इनके संग्राहकों, किसानों व हाथकरघा बुनकरों के आय का स्रोत भी है।
  • कोसा वस्रों की विस्तृत श्रृंखला देखने के लिऐ हमारे वेबसाईट www.onha.in पर लाग ईन करें।
Tags: Kosa silk

Comments

Created By 2020-02-15 13:10:17 Posted By dewans dewangan Comment Link
My kosa utpaden ka bra ma janna chhta hu

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